Saturday, October 25, 2008
सिर्फ़ एक सवाल
मेरा तुम दोनों से सिर्फ़ एक सवाल है, राम और सीता। तुम दोनों ने अपनी सारी ज़िन्दगी समाज के नाम कर दी। चौदह साल का वनवास झेला, ताकि तुम रावन को खत्म कर सको। यूँ तो शादी के एक-आध साल बाद ही अपना परिवार शुरू कर देते हैं लोग, पर तुमने चौदह साल ख़ुद को संतान के सुख से वंचित रखा, ताकि तुम अपने लक्ष्य में कामयाब हो सको। यहाँ तक कि तुम दोनों को एक दूसरे से विरह कि यंत्रणा भी झेलनी पड़ी। सीता को रावन के हाथों अपना अपमान सहना पड़ा। सीता, न जाने रावण ने तुम्हें कितने दुःख दिए होंगे लंका में। राम, उस युद्ध में तुमने कितनी बार अपने शरीर को कटवाया होगा, कितना खून बहाया होगा, कितनी पीडा सही होगी। मेरा सवाल यह है: इतना सब कर के भी तुम्हें क्या मिला? सीता, तुम्हारे ऊपर लांछन लगाया गया, तुम्हारे सतीत्व को नकारा गया। राम, तुम्हारे सामने तुम्हारी पत्नी का अपमान किया गया। तुम्हें मजबूर किया गया कि तुम उसे त्याग दो। और ये सब रावण ने नही किया। ये सब किया उन्ही लोगों ने जिनके लिए तुम दोनों ने दुनिया के सब सुखों का त्याग किया था। तो बताओ मुझे, राम और सीता, तुम्हें क्या मिला?
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